- 34 गोआश्रय स्थलों के जरिये गोरखपुर में गोसंरक्षण अभियान गतिमान
- 5000 गोवंश की क्षमता है इन गोआश्रय स्थलों की
- जिले में निर्माणाधीन है सबसे बड़ा गोआश्रय स्थल, 2000 गोवंश की होगी क्षमता
- मुख्यमंत्री सहभागिता योजना से जरूरतमंद परिवारों को दिए जा रहे गोवंश, पोषण का पैसा दे रही सरकार
गोरखपुर। गोआश्रय स्थलों के निर्माण और मुख्यमंत्री बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के क्रियान्वयन से योगी सरकार गोसंरक्षण के संकल्प को सिद्ध करने में जुटी हुई है। मिशन मोड में जारी सरकार के प्रयासों के सुखद परिणाम गोरखपुर में भी नजर आ रहे हैं। यहां बेसहारा गोवंश को न सिर्फ सम्मानजनक आश्रय मिल रहा है बल्कि निर्धन परिवारों को दुधारू गोवंश की सुपुर्दगी करने के साथ गोवंश के पालन पोषण के लिए दैनिक आधार पर धनराशि भी दी जा रही है। इससे गोवंश सुपुर्दगी लेने वाले परिवारों को दूध के जरिये पोषण प्रदान कर रहे हैं।
गोसंरक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों में गोआश्रय स्थलों की व्यवस्था की गई है जहां बेसहारा गोवंश को ठौर मिला है। इसी क्रम में गोरखपुर में भी 34 गोआश्रय स्थलों के जरिये गोसंरक्षण का अभियान गतिमान है। इन गोआश्रय स्थलों की क्षमता 5000 गोवंश की है और वर्तमान में करीब 4500 गोवंश यहां संरक्षित किए जा रहे हैं। अभियान को और विस्तार देने के लिए सरकार ताल नदोर में एक वृहद कान्हा उपवन भी बनवा रही है। गोरखपुर नगर निगम की तरफ से 28.94 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा यह कान्हा उपवन जिले में अबतक का सबसे बड़ा गोसंरक्षण केंद्र होगा। यहां एक साथ 2000 बेसहारा गोवंश को आश्रय मिलेगा जिससे शहर और आसपास सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश की समस्या का समाधान होगा। इस कान्हा उपवन में काऊ शेड, काफ शेड, बर्थ शेड, कार्यालय भवन, भूसा स्टोर, फीड स्टोर तो होगा ही, गोवंश के नियमित चेकअप और बीमार पशुओं के त्वरित इलाज के लिए परिसर के अंदर ही एक डिस्पेंसरी का निर्माण भी किया जा रहा है। काऊ शेड के सामने छोटे पोखरे का निर्माण कराया जाएगा, ताकि पशुओं को पानी की कमी न हो और उन्हें प्राकृतिक माहौल मिले।

गोरखपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. धर्मेंद्र कुमार पांडेय के मुताबिक गोआश्रय स्थलों में शेड तो बने ही हैं, उनके चारा, पानी और इलाज की भी पर्याप्त सुविधा रहती है। वह बताते हैं कि मुख्यमंत्री बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 250 गोवंश की सुपुर्दगी जरूरतमंद परिवारों या पशुपालकों को दी जा चुकी है। जिन गोवंश की सुपुर्दगी दी जाती है, उनके पालन पोषण के लिए प्रति गोवंश प्रतिदिन 50 रुपये की दर से 1500 रुपये प्रतिमाह की धनराशि सरकार की ओर से दी जाती है।

